इस किताब में 8 सूत्र (Principles)  है जो आपके भीतर के विजेता को बाहर लाने में मददकरेंगे. इन सूत्रों को पढ़िए और फिर उन्हें अपने जीवन में इस्तेमाल कीजिये. और फिर तैयार हो जाइए क्योंकि आप वो जीत हासिल करने वाले है जो आजतक आपने कभी सोची भी नहीं होगी. आप कर सकते है, आप करेंगे !!

You Can You Will Book Summary In Hindi

CHAPTER 1 : अपना लक्ष्य अपने सामने रखे

ये बात अध्ययन (studies) में सामने आई है कि जब आप किसी चीज़ को बार-बार देखते है तो वो चीज़ आपके अवचेतन (subcnscious) मन में गहराई से बैठ जाती है. ये एक जानी मानी तकनीक है अपने सपनो तक पहुचने की, मगर कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपनी पूरी काबिलियत नहीं दिखा पाते. ऐसा इसलिए नहीं कि आप काबिल नहीं है या उतने स्मार्ट नहीं है बल्कि इसलिए क्योंकि आपने अपनी आंखो के सामने गलत चीज़ रखी है. कुछ ऐसा चुनिए जो आपके सपने से मेलखाता हो, उदाहरण के लिए अगर आप एक मेडिकल स्टूडेंट है तो अपनी मेज पर एक प्लास्टिक की खोपड़ी (skull) रखे और जब भी आप पढने के लिए बैठेंगे तो आपके सामने वो प्लास्टिक की खोपड़ी होगी जो आपको आपके लक्ष्य की याद दिलाती रहेगी और आपको ये याद रहेगा कि आपको जिंदगी में क्या हासिल करना है. इसका आपकी पढ़ाई पर एक सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि ये आपको हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी.

मान लीजिये कि आप शादी करना चाहते है, तो अपने घर को खाली चित्रों से भर दे. अब जहाँ कहीं भी आप जायेंगे उन खाली चित्रों पर नजर पड़ते ही आपका शादी करने का इरादा और भी मज़बूत होता जाएगा. और अगर कोई आपसे पूछे “ ये खाली चित्र किसलिए है ?” तो कहिये कि” उस पत्नी के लिए जो मेरे जीवन में आने वाली है”

अगर आप ये सोच रहे है कि आप छोटे सपने देख रहे है ना कि बड़े, क्योंकि आप भगवान् को तकलीफ नही देना चाहते ताकि उपरवाले को आसानी हो आपके छोटे सपने पूरा करने में. तो यकीन मानिए ये सच नहीं है.बल्कि ये इसके एकदम उलट है. जब आप बड़े सपने देखते है तो उपरवाला खुश होता है. सारे बंधन तोड़ दीजिये और कहिये” मै अभी नहीं जानता कि ये कैसे होगा भगवान्,,मगर मै ये जानता हूँ कि ये जब भी होगा तुम्हारी मदद से होगा” भगवान् पर असीमित विश्वास रखकर ही आप उसे प्रसन्न कर सकते है.

चाहे परिस्थितिया कितनी भी अजीब लगे, खुद को विश्वास दिलाये कि सब ठीक है. क्योंकि भगवान् की शक्ति अपरम्पार है. हमारे साधन, परिस्थिया या शिक्षा कोई मायने नहीं रखती जब भगवान् हमारी इच्छा पूरी करना चाहे. जो हम मांगते है, प्रभु उससे बढकर ही हमें देता है बस अगर आपका उस पर पक्का विश्वास हो तो | और अपने सपनो को कभी मत भूलिए, हार कभी भी मत मानिए.

भगवान का आशीर्वाद सदा आपके साथ रहेगा इस बात की अगर आप कल्पना भी नहीं कर सकते तो मत कीजिये. अगर आप अपने लक्ष्य को अपने सामने नहीं रखेंगे और पूरी शिद्दत से उसका यकीन नहीं करेंगे तो आप कभी भी उसे हासिल नहीं कर सकते.

हिल्टन होटल्स के फाउन्डर कोंनार्ड हिल्टन एक दिन एक लेख पढ़ रहे थे जो न्यूयॉर्क के वाल्डरोफ एस्टोरिया होटल के बारे में था. वो इस बात से बेहद प्रभावित हुए कि वो होटल कितना बड़ा और शानदार था. कितना सुन्दर है वो होटल, वो एक दिन उस होटल का मालिक बनने के सपने देखने लगे. अगर वो इस बात को सीधे सीधे सोचते तो ऐसा हो पाना नामुमकिन लगता, मगर उन्होंने इसको कुछ अलग तरीके से सोचा, उपरवाले की मर्ज़ी से सोचा. उन्होंने उस लेख में से होटल की तस्वीरे काटकर अपने सामने लगा दी. वो उन तस्वीरो को बार-बार देखते रहते जब तक कि उनका ये सपना पूरा नहीं हो गया और उनकी कम्पनी ने उस होटल के लगभग 250,000 शेयर्स नहीं खरीद लिए.

नकारात्मक विचारों को (negative thinking ko) कभी भी खुद पर हावी मत होने दीजिये. हो सकता है किसी दिन आप एक बहुत ही तंदुरुस्त व्यक्ति को देखे और खुद से कहे कि “मै तो ऐसा कभी भी नहीं बन सकता” या फिर आप एक बड़ा सा शानदार मकान देखकर अपने से कही कि” मै कभी भी ऐसा कुछ नहीं खरीद सकता”. इन नकारात्मक विचारों का आपकी सफलता पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि वो आपको आगे बढ़ने से रोकती है, आपके नज़रिए को सिमित कर देती है इसलिए आपको अपना नजरिया बदलना पड़ेगा

एक बार एक आदमी था जो हमेशा से ही एक कलाकर बनने के सपने देखता था मगर वो अन्दर से टूटा और बेमकसद था. उसका परिवार इतना गरीब था कि वो लोग वैन में रह रहे थे . एक दिन वो इतना निराश हुआ कि वो अपनी पुरानी गाडी से एक पहाड़ की चोटी पर पंहुचा और नीचे झाँक कर देखा. उसने कुछ ऐसा किया जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था वो गाडी से उतरा और खुद के लिए एक दस मिलियन डॉलर का चेक लिखा, अपनी “अभिनय सेवा” के लिए. बारह साल बाद वो नौजवान जिम कैरी, अपनी हर फिल्म के लिए पंद्रह से पच्चीस मिलियन डॉलर के लगभग पैसा कमा रहा था.

Chapter 2: अपनी रेस खुद दौड़ो

आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में ऐसे कई लोग होंगे जो आपकी जिंदगी को नियंत्रित करने की कोशश करते होंगे. उनका इरादा नेक हो सकता है मगर अपनी जिंदगी को नियंत्रित करने वाले सिर्फ आप होने चाहिए. आपको अपनी रेस खुद ही दौड़नी पड़ेगी. अगर आप अपनी सफलता की कहानी नहीं लिखेंगे तो कोई दूसरा लिख लेगा और फिर आपके लिए कुछ नहीं बचेगा. सबको खुश रखना नामुमकिन है, चाहे आप जो मर्ज़ी कर लीजिये, आप सबको खुश नहीं रख सकते. इस कोशिश में आप खुद को वो काम करते हुए पाएंगे जो आप नहीं करना चाहते या आपको नहीं करने चाहिए. अगर हर बार कोई ना कोई आपके काम में इतनी नुक्ताचीनी करने लगे कि आप वो काम करना ही छोड़ दो तो आप कभी भी कुछ नहीं कर पाओगे. क्योंकि हर कोई आपको उसकी जगह पर रखकर देखने की कोशिश करेगा मगर आप अपनी जगह पर कायम रहे क्योंकि अगर आप उनके हिसाब से चलना शुरू भी कर दे तो वही लोग फिर भी कुछ न कुछ कमी निकाल ही लेंगे.

किसी ने एक बार कहा था कि जब आप 20 के होते हो तो आपको ये फ़िक्र रहती है कि सब आपके बारे में क्या सोचते है मगर 40 में आप ये परवाह करना छोड़ देते तो और 60 में आपको पता चलता है कि कोई आपके बारे में तो सोच ही नहीं रहा था. तो खुद को लोगो की राय से मुक्त रखिये तभी आप सही मायनों में पूरी तरह से आज़ाद हो सकेंगे.

हमेशा अपनी जिंदगी का एक लक्ष्य रखिये. इस बात के लिए तैयार रहे कि हो सकता है कि इस लक्ष्य को पूरा करने की यात्रा में भले ही कुछ लोग आपका साथ ना दे, आपसे दूर हो जाए तो भी परवाह मत कीजिये. जो रास्ता आपने चुना है वो भगवान् ने आपके लिए पहले से ही निर्धारित किया है. लोगो से ज्यादा आपको उपरवाले की मंज़ूरी की ज़रुरत है क्योंकि लोगो की राय हमेशा आपको उलझन में डाल देगी और आप कभी भी स्पष्ट नहीं सोच पायेंगे. तो औरो की बिन मांगी राय पर आपको ये कहना सीखना ही पड़ेगा कि” आपका शुक्रिया, मगर मुझे इसकी ज़रुरत नहीं है”

“जिनकी बार-बार खुशामद करनी पड़े, ऐसे लोगो से ज़रा बचके रहे क्योंकि यही वो लोग होते है जिनके लिए चाहे कितना भी कुछ क्यों ना किया जाए आप उन्हें कभी संतुष्ट नहीं कर सकते. हर बार वो कुछ ना कुछ कमी निकालते ही रहेंगे. आप ज़रा सा चुके नहीं कि ऐसे लोग आपकी जिंदगी की बागडोर अपने हाथ में लेने की कोशिश करने लग जाते है. इन लोगो को खुश करना लगभग नामुमकिन है क्योंकि ये आपसे कभी खुश नहीं होते और ना ही कभी तारीफ़ के दो बोल बोलते है. अगर आप का कोई दोस्त सिर्फ अपने मतलब के लिए दोस्ती निभा रहा है तो ऐसे लोगो से दूरी बना लेना ही बेहतर होगा. अगर वो आपकी जिंदगी से जाते है तो चले जाए. ,

एक बहुत पुरानी कहानी है, एक दादा और पोते की. एक बार एक दादा अपने पोते को अपने गधे पर बैठाकर कहीं ले जा रहा था. कुछ दूर जाने पर लोग उन्हें देखते है, तो कहते है कि “ देखो! ये पोता कितना स्वार्थी है, खुद तो गधे के ऊपर बैठा है और अपने बूढ़े दादा को पैदल चलने पर मजबूर कर रहा है. लोगो की बाते सुनकर दादा परेशान हो जाता है. वो अब पोते को उतार कर खुद गधे की सवारी करने लगता है. मगर कुछ आगे जाने पर फिर से कुछ लोग उन्हें देखकर कहते है “ अरे! दादा तो बड़ा मतलबी है जो खुद अकेले गधे की सवारी कर रहा है और बेचारे पोते को पैदल चला रहा है. लोगो की बातो से परेशान होकर दादा इस बार पोते को भी अपने साथ गधे पर बैठा लेता है. मगर इस भी बार लोग उन दोनों को भला बुरा बोलने लगते है कि दादा-पोता कितने निर्दयी है जो दोनों उस गधे पर बैठकर उस पर अपना सारा बोझ डाले हुए है.

इस कहानी का सार ये है कि आप चाहे जो भी कर ले फिर भी सबको एकसाथ खुश नहीं रख सकते. कुछ लोग फिर भी आपकी आलोचना करते रहेंगे. तो बजाये सबकी परवाह करने के अपना एक लक्ष्य खुद ही चुनिए और उस पर डटे रहिये जब तक सफलता नहीं मिल जाती

Chapter 3: अपने जीवन में अच्छी चीजों की उम्मीद कीजिये

ये एक नियम है कि जब आप अपने लिए बेहतर चीजों की आशा करते है तो वो बेहतर चीज़े खुद-ब-खुद आपको मिलती है. लेकिन जब आप बार-बार निराशाजनक बाते सोचेंगे तो क्या होगा ?? ज़ाहिर है वही निराशा आपके जीवन में आएगी. क्योंकि आप जो सोचते है वही आपके साथ होता है. भगवान् हमेशा आपको वही देता है जिसका ख्याल आपके दिल में बना रहता है.

हर सुबह ये सोच कर उठिए कि ‘आज आपका दिन बहुत ही शानदार गुजरने वाला है. इस सोच के साथ दिन की शुरुवात करेंगे तो पायेंगे कि जो आपने सोचा था वही आपको मिल रहा है. अगर आप किसी परीक्षा के लिए जा रहे है तो उम्मीद कीजिये कि आप उसमे बहुत अच्छा करने वाले है. ऐसा सोचने से ना सिर्फ आपका हौसला बढेगा बल्कि आपमें एक नए उत्साह का संचार भी होगा जो आज से पहले कभी नहीं था. कुछ लोग हमेशा ही निराशा से घिरे रहते है. वे अपने बारे में कभी कुछ अच्छा सोच ही नहीं पाते.

“मै कभी वजन कम नहीं कर सकता, उस पार्टी में मुझे कोई पसंद नहीं करेगा, मुझे कभी किसी का सच्चा प्यार नहीं मिल सकता”.ऐसे लोगो को लगता है कि उनके ऐसा सोचने से काम आसान हो जाएगा क्योंकि अगर उनके साथ कुछ अच्छा नहीं हुआ तो वो बोलेंगे” देखा मैंने तो पहले ही कहा था” और अगर कुछ अच्छा हो गया तो वे बहुत हैरान रह जायेंगे कि आखिर उनके साथ ये कैसे हो गया. हालांकि निराशावादी लोगो के साथ कभी कुछ अच्छा नहीं होता. अब अगर आशा करने के बावजूद आपके साथ ऐसा नहीं हुआ जो आप चाहते थे तो भी निराश ना हो. फिर से कोशिश कीजिये और तब तक करते रहिये जब तक सफलता आपके हाथ नही लग जाती. ज़रुरत है तो बस यही कि हर उस बाधा को अपने रास्ते से हटा दीजिये जो आपको आपकी मंजिल तक पहुचने से रोक रही है.

अनेक अध्ययनों से (Studies se) ये सामने आया है कि आशावादी और निराशावादी विचार दोनों हमारे दिमाग के दो अलग-अलग हिस्सों की देन है. आशावादी विचारों की तुलना में निराशावादी विचारो को प्रोसेस होने में ज्यादा वक्त लगता है और शायद यही वजह है कि निराशावादी विचार हमारे दिमाग में लम्बे समय तक रहते है.

उदाहरण के लिए आप इस बात को कभी भूल नहीं पायेंगे कि आप परीक्षा में फेल हुए थे बजाये इसके कि कभी आप पास भी हुए होंगे. इस तरह नकरातमक विचारों का हमारे दिमाग में गहरा असर पड़ता है.

किसी ने आपके लिए कभी कुछ ऐसा किया था जिससे आपके दिल को बेहद ख़ुशी हुई . ये बात आपको अचानक एक दिन अपने काम के दौरान याद आती है. उस घटना को याद करके आप मुस्कुरा उठते है और एक बार फिर से उसे अपने जेहन में उस पूरी घटना का चित्रण (picturization) करने लगते है.आप दुगने जोश से भरकर अपने काम में जुट जाते है क्योंकि आपका मूड अच्छा हो गया. तो देखा आपने कि कैसे ये आशावादी विचार आपको और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करते है. और ये भी मुमकिन है कि बीते हुई कडवी यादे आपको और भी उदास कर दे. और फिर होगा ये कि उसका असर आपकी क्षमता और काबिलियत पर पड़ेगा.

अपने दिमाग को आप एक टीवी सेट की तरह समझिये जिसमे बहुत से चैनल है. कुछ चैनल आपकी मधुर यादो से जुड़े है तो कुछ कडवी यादो से. अब इस टीवी का रिमोट अपने हाथ में रखिये. जो यादे आपको ख़ुशी और उत्साह से भर देती है केवल उन्ही यादो का चैनल अपने दिमाग में चलने दे. इन मीठी यादो को बार बार याद कीजिये. ठीक वैसे ही जैसे आप सिनेमा हाल में मज़े से बैठकर पॉपकॉर्न और सोडा के साथ अपनी मनपसंद फिल्म देखते है. वो वक्त याद कीजिये जब आपको लगता था कि आपके साथ सब कुछ गलत ही गलत हो रहा है और फिर उसके कुछ दिनों बाद या महीनो बाद या कहिये सालभर बाद ही अचानक आपकी स्तिथि में सुधार होने लगता है. आप ये सोच कर हैरान हो जाते है कि किस तरह से उपरवाले ने आपके लिए कठिन स्तिथि में भी रास्ता ढूंढ ही निकाला है. याद कीजिये ऐसे कई निराशा भरे पल जब आप खुद से ही ये कहते है” मै कभी भी इस मुसीबत से नहीं निकल पाऊंगा”. आप बस इसी दुःख में रहते है और फिर आप उस मुश्किल हालात को ऐसे पार कर लेते है जैसे कि वो कोई बड़ी बात थी ही नहीं.

आकर्षक व्यक्तित्व वाली रचेल (Rachael Smith) स्मिथ नाम की महिला उस कार्य के लिए समर्पित थी जो विकासशील देशो के बच्चो की भलाई से सम्बंधित था. ये साल 2007 की बात है जब उन्होंने मिस यूनीवर्स प्रतियोगिता में भाग लिया था. प्रतियोगिता के दौरान स्टेज पर चलते उनका संतुलन बिगड़ा और वे अपने पीठ के बल गिर पड़ी. ये उनकी जिंदगी का एक बेहद शर्मनाक पल था. वहां उपस्थित लोगो की भीड़ उनपर हंसने लगी और गिरने का मज़ाक उड़ाने लगी. हालांकि वो तुरन्त उठकर खडी भी जो गयी और उन्होंने अपने रेम्प वाक भी पूरी की. उन्होंने वहां रखे सवालों के बक्से से अपने लिए एक पर्ची चुनी जिस पर लिखा था” अगर आपको अपना मनपंसद पल फिर से जीने को मिले तो वो क्या होगा?” बिना किसी झिझक के उन्होंने ज़वाब दिया कि वो साउथ अफ्रीका में बिताये अपने उन पलो को फिर से जीना चाहेंगी जब उनकी कोशिश से ज़रूरतमंद बच्चो के चेहरे पर मुस्कान आई थी. उस मुस्कान को दुबारा देखने के लिए ही वो उस वक्त में वापस जाना चाहेंगी बजाये इसके कि वो एक बार फिर से स्टेज पर बिना गिरे वाक पूरी करे. उन्होंने उस कडवी याद को तुरंत ही अपने दिमाग से भुला दिया था और उन पलो को याद रखा था जिनसे उन्हें ख़ुशी मिली.

Chapter 4: हमेशा एक सकारातमक (positive) सोच रखे

एक विजेता की सबसे बड़ी खूबी होती है उसकी सकारात्मक सोच. ऐसे लोग जब सुबह उठते है तो उम्मीद से भरे एक खुशनुमा दिन की कल्पना करते है. अपने हर सफल कार्य के पीछे उपरवाले का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते ऐसे लोग. और उनका यही आशावादी रवैया उनके हर दिन को बेहतर बनाता है.

अब ज़रा कल्पना कीजिये कि आप एक गाडी चला रहे है जिसका सारा नियंत्रण आपके हाथो में है. आप चाहे तो उसे आगे ले जाए या पीछे मगर उसके लिए ताकत बराबर ही लगेगी. है ना?? ठीक उसी तरह हमारी जिंदगी की गाडी भी चलती है. अब ये आपके हाथ में है कि आप उसे अपने सकारातमक विचारों से आगे बढाए या फिर नकारात्मक विचारों से भर कर कामयाबी की दौड़ में बहुत पीछे रह जाए.

हम में से बहुत से लोग ऐसे है जो अपनी हर असफलता का दोष परिस्तिथियों पर डाल देते है. आप उन्हें अक्सर ये कहते हुए सुन सकते है कि “मेरा बचपन बहुत अभावो में बीता इसलिए मै ये नहीं कर पाया” या फिर “उनकी बीमारी ने उन्हें चिडचिडा बना दिया है ”.

मगर ये सारे बहाने है सफलता हासिल ना कर पाने के. आपको ऐसे कई लोगो के उदाहरण मिल जायेंगे जिन्होंने गरीबी और अभावो में पैदा होकर भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े है.

आप लोगो के दो समूह लीजिये. उनमे से एक समूह के लोग आशावादी है और दुसरा समूह निराशावादी लोगो का है. अब परिस्तिथि चाहे जो भी हो उन दोनों समूह के लोगो के सामने एक जैसी ही चुनौतियां रखे. अब आप जब परिणाम देख्नेगे तो हैरान रह जायेंगे. आशावादी लोगो के समूह ने उन चुनौतियों से निपटने का कोई न कोई रास्ता निकाल लिया होगा मगर निराशावादी अपने स्वभाव के अनुसार यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बैठे होंगे. तो ज़ाहिर है कि ये सभी बाते आपकी पूर्वनिर्धारित सोच का परिणाम है.

आप खुश रहेंगे या दुखी, ये निर्भर करता है परिस्तिथियों से निबटने की आपकी सोच पर. परिस्तिथिया कभी भी मुख्य कारण नहीं होती, कारण बनते है हमारे अपने विचार.

ये आप पर निर्भर है कि आप अपने दिन की शुरुवात किस तरह करना चाहते है. एक व्यक्ति सुबह उठकर कहता है “ सुप्रभात, शुक्रिया भगवान् आज के दिन के लिए “ वही दूसरा यक्ति बोलता है “ओह नहीं ! सुबह हो गयी”. अब आप खुद चुनिए कि आप इनमे से कौन सा व्यक्ति बनना चाहते है. जो बाते आपके नियंत्रण से बाहर है उन्हें कभी भी अपनी खुशियों या नाखुशी की वजह मत बनने दीजिये और ना ही इस बात को कि लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करते है, या फिर सड़क पर ट्रेफिक जैसे मामूली बातो पर विचार कीजिये. जो चीज़े आपके वश में नहीं है उन्हें स्वीकार करना सीख लीजिये. कुछ बाते, परिस्तिथिया कभी नहीं बदलती… तो बेहतर है उनके बारे में परेशान होना छोड़ दिया जाए. बेहतर है कि आप पहले से ही सोच लीजिये कि हर हाल में आज आपका दिन बहुत अच्छा गुजरने वाला है.

जीतना आपके खून में शामिल है क्योंकि उपरवाले ने आपको जीतने के लिए ही बनाया है ना कि एक मामूली जिंदगी जीने के लिए. अगर भगवान आपको पहले से ही आपकी जीत का रास्ता दिखा दे या वो मौके आपके सामने खोल दे जो आपको कामयाबी तक ले जाए तो ज़ाहिर है कि आप अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त रहेंगे और हर पल उत्साह के साथ बिताएंगे. मगर ये असल जिंदगी में कहाँ होता है ? भविष्य में क्या होने वाला है ये तो कोई भी नहीं जानता. लेकिन फिर भी इस बात पर पूरा यकीन करते है कि उपरवाले ने आपके लिए कुछ बेहतर ही सोचा होगा. अब अगर इसके बावजूद भी किसी कारण आप मनचाहा प्राप्त नहीं कर पाते तो भी निराश मत होइए और ये कहना शुरू मत कीजिये कि “ मुझे तो पहली ही पता था कि कामयाबी मेरे नसीब में नहीं है” बजाये इसके आप ये कहिये” शायद भगवान् की कुछ और इच्छा होगी, शायद उसने मेरे लिए कुछ बेहतर सोचा होगा”.

हमेशा अपने विचारों पर ध्यान दीजिये कि वो किस ओर जा रहे है. हार और असफलता के बारे में सोचना आपको हार का मुंह ही दिखायेगा. हो सकता है कि आपकी यही निराशावादी सोच आपके जीवन में सच्चे प्यार को आने ही ना दे रही हो.

नकरात्मक विचार आपके उत्साह को कम कर देते है और आपके भीतर रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है जिससे अनेक रोग आपको घेर लेते है. केंसर के मरीजो के इलाज में एक बहुत महतवपूर्ण हिस्सा इलाज के प्रति उनका रवैया भी है. उनके इस खतरनाक बिमारी से लड़ने का ज़ज्बा भी कहीं न कहीं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में मदद करता है.  ऐसे लोगो के जीने की संभावना बड जाती है जो केंसर की घातक बिमारी को हराकर एक स्वस्थ जीवन जीने की कल्पना करते है. अगर कोई कैंसर रोगी अपनी बिमारी से घबराकर जीने की आशा ही छोड़ दे तो उसका प्रभाव ज़रूर उसके इलाज़ पर भी पड़ता है. मरने से पहले ही जिंदगी से हार मान लेना समस्या का समाधान नहीं है.

एक वैज्ञानिक प्रयोग के लिए डॉक्टर्स ने रोगियों को दो समूहों में बाँट दिया. दोनों समूहो के रोगियों के घुटने ज़वाब दे चुके थे जिन्हें सर्ज़री की ज़रुरत थी. डॉक्टर्स ने सर्जेरी केवल पहले समूह पर की और दुसरे समूह के लोगो को बेहोश करके उनके घुटनों पर कुछ ऐसे कट के निशान लगाए जिनसे उन्हें सर्ज़री हो जाने का यकीन हो. करीब दो साल बाद ये चौकाने वाली बात सामने आई कि पहले समूह के रोगियों की तरह दुसरे समूह के रोगियों ने भी अपने घुटनों की तकलीफ से निजात पाने की जानकरी दी. हालांकि उनके घुटनों की सर्ज़री तो कभी हुई ही नहीं थी. और उससे बढकर हैरानी की बात ये थी कि जांच करने पर उनके घुटने पहले से बेहतर स्तिथि में मिले. और ये सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें अपने स्वस्थ हो जाने का विश्वास हो गया था.

दोस्तो इस बुक समरी को लिखने में काफी समय लगा है अगर इस लेख को आप अपना थोड़ा सा प्यार दिखाएंग तो हम इस बुक के बाकी के 4 सूत्र भी जल्दी ही – gyanwallet.com पर पब्लिश करेंगे

अंत मे धन्यवाद पोस्ट अच्छा लगा हो तो अपने दोस्त और फैमिली के साथ जरूर शेयर करे

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