The one thing book summary in hindi
Ye book The one thing book summary in hindi aapko kam time me zaada kaam karne ke rules btati hai. Aur hume btati hai ki successful log isiliye successful hue hai kyunki vo ek important kaam me sabse zaada waqt guzaarte hai na ki bhut saare kaam kar ke average rehte hai.Agar aapne 80/20 principle ke baare me suna hai to ye 80/20 principle ka extreme case hai. EXTRAORDINARY LOGO KI SUCCESS KA IKLAUTA SECRET Pyare mitro to chaliye suru karte hai aaj k hmare book summary ko – the one thing book summary in hindiपहला आदमी: क्या तुम जानते हो कि जीवन का रहस्य क्या है?दूसरा आदमी: नहीं। क्या है?पहला आदमी: यह। [एक उंगली ऊपर करता है।]दूसरा आदमी: तुम्हारी उंगली?पहला आदमी: एक चीज। केवल एक चीज। तुम केवल उसी से लगे रहो और दूसरी सारी चीजें बिना मतलब हैं। दूसरा आदमी: बहुत बढ़िया। पर वह “एक चीज” क्या है?पहला आदमी: यही तो तुम्हें पता करना है।यदि आप अपनी एक चीज के साथ पर्याप्त लंबे अरसे तक लगे रहें तब “आप जरूर जीतेंगे”। यही सफलता का रहस्य है। किसी भी असाधारण आदमी और उसकी अचीवमेंट्स के पीछे का एकलौता रहस्य।गोइंग स्मालयदि हर आदमी के लिए दिन में उतने ही घंटे होते हैं, तब ऐसा क्यों लगता है कि कुछ व्यक्ति औरों से इतना ज्यादा पा लेते हैं? उत्तर है कि – दे गो स्माल। “गोइंग स्माल” है उन दूसरी सारी चीजों की अनदेखी कर देना जिन्हें आप कर सकते थे, और वही करना जोIMPORTANT HAI भाग 1:- झूठ: वे हमें भरमाते हैं और पटरी से उतार देते हैंझूठ नं. 1: सभी चीजों का महत्व एक समान हैन्याय और अधिकारों के नाम पर अनुसरण की जाने वाली बराबरी एक योग्य आदर्श है। तब भी, रिजल्ट्स की असली दुनिया में चीजें कभी भी एक बराबर नहीं होतीं। चाहे लोग कितने भी टैलेंटेड हों — इनमें से कोई भी दो कभी भी एक समान नहीं होते। हर चीज का महत्व भी एक बराबर नहीं होता। बराबरी एक झूठ है।हर चीज का महत्व समान नहीं होता, और सफलता कोई खेल नहीं है कि उसे वही जीते जो सबसे अधिक करता है। मगर रोजाना अधिकतर लोग ठीक इसी तरह से खेलते हैं। हालांकि टु-डू लिस्ट्स हमारे अच्छे इरादों के उपयोगी कलेक्शन का काम करते हैं, वे हमें छोटी-छोटी, गैरजरूरी चीजों से डराने का काम भी करते हैं जिन्हें हम करने के लिए मजबूर होते हैं — क्योंकि यह हमारी लिस्ट में हैं। अचीवर्स अलग तरीके से काम करते हैं। अचीवर्स हमेशा प्रायॉरिटी के क्लियर सेंस से काम करते हैं। टु-डू लिस्ट्स की जगह, आपको एक सफलता लिस्ट की जरूरत है  –– एक ऐसी लिस्ट जो असाधारण नतीजे पैदा करती है।यदि आपकी टु-डू लिस्ट में हरेक चीज है, तब शायद यह आपको सभी जगहों पर ले जा रही है, सिवाय उस जगह के जहाँ आप जाना चाहते हैं। पैरेटो के प्रिंसिपल का प्रयोग करना। पैरेटो का प्रिंसिपल, जो 80/20 प्रिंसिपल के नाम से भी जाना जाता है,यह कहता है कि आपकी अल्पसंख्यक कोशिशें (20 परसेंट) बहुसंख्यक रिजल्ट्स लाती हैं (80 परसेंट)। यह हमें सही दिशा दिखाता है। आप जो चाहते हैं उसका अधिकांश आप जो करते हैं उसके कमतर अंश से आएगा। ज्यादा लोग इसे समझते नहीं हैं मगर असाधारण रिजल्ट्स गैर-समानुपाती ढंग से हमारी कमतर कार्यवाहियों से आते हैं। परस्थितियों पर निर्भर करते हुए, यह 90/20 के रूप में भी खेल सकता है, जहाँ आपकी 90 परसेंट सफलता आपकी 20 परसेंट कोशिश से आती है। या 70/10 या 65/35. केवल इतना समझ लीजिए कि यह सभी एक ही प्रिंसिपल पर काम कर रही हैं।अंतर्दृष्टि यह है कि हर चीज का महत्व एक समान नहीं है; कुछ चीजें दूसरी चीजों से ज्यादा जरूरी हैं — बहुत ज्यादा। जब आप पैरेटो के प्रिंसिपल का प्रयोग करते हैं, तब टु-डू लिस्ट सफलता लिस्ट बन जाती है।यदि आप किसी हद को पार कर आगे जाना चाहते हैं, तब आप जितनी चाहें उतनी लंबी लिस्ट के साथ शुरुआत करें, परंतु यह मानसिकता विकसित करें कि आप वहां से अपना रास्ता कुछ क्रिटिकल चीजों पर  तराश लेंगे और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक आपको वह अति आवश्यक एक चीज नहीं मिल जाए।झूठ नं. 2: मल्टीटास्किंगमल्टीटास्किंग एक झूठ है क्योंकि लगभग सभी मानते हैं यह करने वाली बहुत एफेक्टिव चीज है, क्योंकि यदि आप दो चीजें एक साथ करने की कोशिश करते हैं, तब आप इनमें से किसी को भी अच्छी तरह नहीं करेंगे या कर नहीं पाएँगे।मल्टीटास्किंग कम काम करने का इफेक्टिव तरीका है। टर्म “मल्टीटास्किंग” कंप्यूटर के कई काम एक साथ करने की क्षमता का वर्णन करने के लिए 1960 के दशक में उभरा था। फिर भी, यह टर्म अंदरूनी तौर पर धोखेबाजी का है। मल्टीटास्किंग का मतलब है एक ही संसाधन (CPU) का एकांतर से साझा करना, परंतु समय के साथ संदर्भ बदल गया, और इसका अर्थ निकाला जाने लगा एक ही संसाधन (एक व्यक्ति) द्वारा का एक साथ मल्टिपल टास्क्स किया जाना।लोग एक साथ दो या ज्यादा काम कर सकते हैं, जैसे टहलना और बातें करना, परंतु हम एक साथ दो चीजों पर फोकस नहीं कर सकते। हमारा ध्यान आगे पीछे होता रहता है। यह कंप्यूटरों के लिए तो ठीक है, परंतु मनुष्यों में इनके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। जब आप एक टास्क से दूसरे टास्क पर स्विच करते हैं, तब दो चीजें होती हैं।पहली लगभग तत्काल है : आप स्विच करने का निश्चय करते हैं। दूसरी कम प्रेडिक्टेबल है : आप जो भी करने वाले हैं उसके लिए आपको “नियमों” को ऐक्टिवेट करना पड़ेगा। हमेशा किसी नए टास्क को शुरू करने में और जिसे आपने छोड़ दिया है उसे फिर से शुरू करने में कुछ समय लगता है।और कोई भी गारंटी नहीं है कि आपने जहाँ छोड़ा था वहीं से शुरू करेंगे। तो हम कभी भी मल्टीटास्किंग को बर्दाश्त क्यों करें जब हम सबसे महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं? केवल इसलिए कि हमारा दिन का काम बाइपास सर्जरी से संबंध नहीं रखता इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी सफलता के लिए फोकस करना कम क्रिटिकल है। आपका काम इससे कम आदर डिजर्व नहीं करता।You Can also Read These Book Summary :- 
1.Subtle Art Of Not Giving A FuCk In Hindi2. You Can You Will Book Summary In Hindi
झूठ न. 3: एक डिसिप्लिन्ड जीवनअधिकतर लोग जिसे मानते हैं उससे उलट, सफलता डिसिप्लीन्ड एक्शन की लंबी दौड़ नहीं है। अचीवमेंट आपसे यह मांग नहीं करता कि पूरे समय एक डिसिप्लीन्ड व्यक्ति बने रहें जहाँ आपका हर ऐक्शन प्रशिक्षित हो और जहाँ हर परिस्थिति का समाधान नियंत्रण है। असल में सफलता एक छोटी दौड़ है — एक स्प्रिंट, जिसमें इंधन तो डिसिप्लीन का है, केवल उतनी ही देर तक जब तक आदत हावी न हो जाए।आप जितना सोचते हैं उससे कम डिसिप्लीन से आप सफल हो सकते है, इसका कारण सीधा-सादा है : सफलता सही चीज करने के बारे में है, हर चीज सही करने के बारे में नहीं। सफलता के लिए तरकीब है सही आदत चुनना और केवल उतना ही डिसिप्लीन जो इसे जमाने के लिए काफी हो। बस हो गया।जैसे-जैसे यह आदत आपके जीवन का हिस्सा बनती है, आप एक डिसीप्लीन्ड व्यक्ति की तरह दिखने लगेंगे, मगर आप होंगे नहीं। आप वह व्यक्ति होंगे जिसने एक मजबूत आदत बनाने के लिए सेलेक्टिव डिसिप्लीन का इस्तेमाल किया था।झूठ न.4: विलपावर जब चाहें तब आ सकती हैअधिकतर लोग यह मान कर चलते हैं कि विलपावर का बहुत महत्व है, परंतु कई पूरी तरह नहीं समझते होंगे कि सफलता के लिए यह कितना ज्यादा जरूरी है। विलपावर इतना महत्वपूर्ण है कि इसका प्रभावी उपयोग सबसे ऊँची प्रायॉरिटी होनी चाहिए। दुर्भाग्यवश, चूंकि इसे हमेशा अपनी इच्छा से बुलाया नहीं जा सकता, इसके सबसे अच्छे उपयोग में लाने के लिए आपको इसे मैनेज करने की जरूरत होती है।विलपावर एक समय-सापेक्ष मुद्दा है; जब आपकी अपनी विल होती है, आप अपने मन-मुताबिक कर सकते हैं। विलपावर की बैटरी का जीवन सीमित होता है परंतु कुछ रुक कर इसे रीचार्ज किया जा सकता है। आपको अपनी विलपावर के इंधन की गेज की चौकसी करना जरूरी है। पूरे-बल के विलपावर के लिए भरे टैंक इंधन की जरूरत होती है। इंधन कम होने के कारण कभी भी महत्वपूर्ण चीजों पर समझौता मत होने दीजिए। नियमित रूप से सही भोजन कीजिए और काफी विश्राम लीजिए।आप अपने विलपावर को काम में कैसे लगाते हैं? इस बारे में सोचिए। इस पर ध्यान दीजिए। इसका सम्मान कीजिए। प्रतिदिन, जो चीज सबसे जरूरी है उसे सबसे पहले कीजिए, जब आपका विलपावर सबसे बलशाली रहता है। अधिकतम शक्ति का मतलब है अधिकतम सफलता। झूठ नं. 5: संतुलित जीवनSantulit jeevan yaani balanced life ka idea hame bhut zaada attract karta hai par ye practical nhi hai । सभी चीजों पर ध्यान देने के लिए आपकी कोशिशों से, aap kuch bhi theek dhang se nhi kar paate, aur किसी के भी साथ इन्साफ नहीं होता।जब हम कहते हैं कि हम अपने संतुलन से बाहर हैं, tab hum ye kehana chahte hai ki हमारी कुछ प्रायॉरिटीज –– चीजें जो हमारे लिए महत्व रखती हैं –– उनकी देख-रेख नहीं हो रही है या वे पूरी नहीं की जा रही हैं। समस्या यह है कि जब आप उस चीज पर फोकस करते हैं जो सबसे जरूरी है, तब कोई-न-कोई चीज हमेशा अनदेखी रह जाएगी। हमेशा चीजें अधूरी रह जाएँगी। बढ़िया रिजल्ट पाने के बदले कुछ चीजों को बिन-किए छोड़ना जरूरी हो जाता है। मगर आप सारी चीजों को बिन-किए नहीं छोड़ सकते हैं, और यहीं par kaam aata hai aapka काउंटरबैलेंसिंग karne ka skill । अपने काम और अपने व्यक्तिगत जीवन की काउंटर-बैलेंस आपके लिए bhut जरूरी ban jaati है।झूठ नं. 6: बड़ा खराब हैयह संभवतः इन सभी में सबसे खराब झूठ है, क्योंकि जब आप बड़ी सफलता से डरते हैं, तब इसे पाने के लिए अपनी कोशिशों से या तो आप बचेंगे या उन्हें नाकाम करेंगे। कोई भी नहीं जानता कि सफलता की चरम-सीमा क्या है, इसलिए इसके बारे में चिंतित होना समय बरबाद करना है। जब आप खुद को स्वीकारने की इजाजत देते हैं कि बड़ा उसी के बारे में है जो आप बन सकते हैं,तब आप इसे अलग नजर से देखते हैं। असाधारण नतीजों के लिए बड़ा सोचना अनिवार्य है। सफलता को action कार्यवाही की आवश्यकता होती है, और कार्यवाही को विचार की जरूरत होती है। परंतु यहाँ एक कैच है –– जो कार्यवाहियाँ actions बड़ी सफलता हासिल करने के लिए स्प्रिंगबोर्ड बनती हैं, केवल वही actionsहैं जिनकी शुरुआत बड़ी सोच की जानकारी के साथ की गई थी।  इनका कनेक्शन जोड़िए, और आपकी सोच कितनी बड़ी है, यह समझ में आने लगेगा।हरेक के पास समय की मात्रा एक ही है, और परिश्रम केवल परिश्रम है। नतीजे के रूप में, अपने काम के समय आप क्या करते हैं निर्धारित करता है कि आप क्या अचीव करेंगे। और चूंकि आप जो करते हैं वह इससे निर्धारित होता है कि आप क्या सोचते हैं, आप कितना बड़ा सोचते हैं वह इसका लॉन्चिंग पैड बनता है कि आप कितनी ऊँचाई को अचीव करते हैं। बड़े से मत डरिए।साधारण कोटि का होने से डरिए। केवल बड़प्पन से जीना ही आपको असली जीवन और कर्म की संभावना का अनुभव कराएगा। सफलता का अर्थ यही निकलता है : अपने जीवन के हर पल में उचित होना। यदि आप ईमानदारी से कह सकते हैं, “यही वह जगह है जहाँ मुझे ठीक इस समय होना चाहिए था, ठीक वही करते हुए जिसे मैं अभी कर रहा हूँ,” तब आपके जीवन की सभी अद्भुत संभावनाएँ संभव बन जाती हैं।Focusing Questions
“वह एक चीज क्या है जिसे मैं कर सकता हूँ …”:
Dosto kaisa laga ye hmara article the one thing book summary in hindi comment box me jarur btayeAap hamare es book summary ko The one thing book summary in hindi Ko aapne friends k sath jarur share kare finally thanks for Reading

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here