Book summary In Hindi

48 Laws of Power Book Summary in Hindi

Hello Friends Aaj Ki Book Summary Hai 48 Laws of Power

Book Summary in Hindi of 48 Laws of Power in hindi आइये जानते है

48 Laws of Power – Book Summary in Hindi

“The Fourty Eight Laws Of Power “ एक क्लासिक बुक है जो सबसे पहले 1998 में पब्लिश हुई थी और जल्द ही ये एक इंटरनेशनल बेस्टसेलर बन गई. इसमें लिखी हुई 48 एडवाइस पढ़कर कोई भी इंसान पॉवर हासिल कर सकता है. हर एडवाइस के साथ लेखक ने अलग-अलग लोगो की अलग-अलग कहानियां दी है ताकि रीडर्स को प्रिंसिपल समझने में आसानी हो. किताब की शुरुवात में दिए गए कुछ लॉज़ को लेकर हमने ये समरी बनाई है जिनके बारे में हम यहाँ जानेगे.

“अगर ये दुनिया जालसाजियों से भरा हुआ कोर्ट है और हम अंदर फंस ही चुके है तो कोई फायदा नहीं होगा कि हम बिना लड़े बाहर आने की कोशिश करे” हम शायद नोटिस ना कर पाए मगर सच तो ये है कि हमें पॉवर के लिएरोज़ ही स्ट्रगल करना पड़ता है. परिवारके अन्दर, काम पर या कम्युनिटी में, लगभग हर जगह हमें खुद के लिए लड़ना पड़ता है.हम चाहे या ना चाहे मगरइस दुनिया में रहने के लिए हमें पॉवर की ज़रुरत पड़ ही जाती है.

इसीलिए हमें खुद को किसी हाल में पॉवरलेस नहीं बनने देना है क्योंकि ऐसा करना खुद के पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा. “ सच बात तो ये है कि जितनी ज्यादा पॉवर हमें हासिल होगी, हम उतने ही बढ़िया दोस्त, लवर, हसबैंड, वाइफ और इंसान बन पाएंगे”.

मगर दुसरो पर या चीजों को अपने पॉवर में करने से पहले ज़रूरी है कि हमारा पॉवर खुद पर और इमोशन पर हो. जब हमारे साथ कुछ होता है तो उस बात के ऊपर एकाएक इमोशनल रिएक्ट करने की आदत को कैसे कण्ट्रोल करे, यही हमें सीखना है. क्योंकि हर बात पर तुरंत रिएक्ट करने से रीजनिंग पॉवर कम होने लगती है. इससे आप किसी बात को क्लीयरली सोचे समझे बगैर इमोशन में आकर गलत डीसीज़न भी ले सकते है.

अपने इमोशन को कण्ट्रोल करना बहुत मुश्किल होता है खासकर बात जब प्यार और गुस्से की हो. इन फीलिंग्स को आप बिलकुल ही फील ना कर पाए ये तो हो नहीं सकता इसलिए ऐसी कोशिश भी ना करे. बस इतना ध्यान रखे कि आपको अपनी फीलिंग एक्सप्रेस करते वक्त थोडा केयरफुल रहना है क्योंकि पॉसिबल है कि आपके दुश्मन इसे आपके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते है.

अब जब आप ये फाउन्डेशन समझ गए हो तो इसके पहले लॉ के बारे में सीखते है.

 

दोस्तों पर ज़रुरत से ज्यादा भरोसा ना करे, अपने दुश्मनों का इस्तेमाल करना सीखे

हान डाइनेस्टी खत्म होने के 700 सालो बाद भी चाइना में अफरा तफरी बनी रही. राजगद्दी के लिए छीना-झपटी चलती रहती थी. हर नए राजा को मौत के घाट उतार दिया जाता था और आर्मी तख्तापलट करती रहती थी. पॉवर की ये लड़ाई खून और मार-काट से रंगी हुई थी.

ऐसे ही एक राजा को उसके जेर्नल्स ने मार डाला और उसके बाद अपने में से ही सबसे स्ट्रोंग आदमी को चुनकर उसे राजा बना दिया था. इस नए राजा ने भी अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए अपने सारे पॉवरफुल आदमियों को मरवा दिया. मगर कुछ सालो में वो खुद भी मारा जायेगा क्योंकि उससे छोटी उम्र वाले नए जेर्नल उसके खिलाफ साजिश रचकर उसको और उसके बेटो को मार देंगे.

ये पैटर्न यूँ ही चलता रहेगा. जो भी राजा बनेगा उसकी जान हमेशा खतरे में रहेगी क्योंकि उसका हर कोई दुश्मन है. चाइना का एम्परर बनने का मतलब है एक अकेला, इनसिक्योर राजा जिसके हाथ में कोई असली पॉवर नहीं है.

मगर जब 959 एडी में जेर्नल चाओ कुयांगयिन को पॉवर मिली तब ये सारा गेम ही चेंज हो गया. वो एम्परर सुंग बना. उसे अपनी सिचुएशन के बारे में अच्छे से पता था कि आने वाले कुछ सालो बाद उसका भी खून हो सकता है. उसने इस चीज़ को रोकने का रास्ता सोचा.

राजा बनने के बाद एम्परर सुंग ने अपने सभी आर्मी जेर्नल को पार्टी सेलीब्रेट करने के लिए इनवाईट किया. पार्टी में जब लोग वाइन के नशे में धुत्त हो गए तब एम्परर ने जेर्नल्स को छोड़कर बाकी लोगो और गार्ड्स को वहां से चले जाने का हुक्म दिया. अब एम्परर के साथ कोर्ट में सिर्फ जेर्नल्स रहे गए थे, उन्होंने सोचा कि एम्परर सुंग उन्हें मरवाने का हुक्म देगा. मगर ऐसा नहीं हुआ.

एम्परर सुंग ने उनसे कहा“रोज़ मेरा दिन डर के साये में गुज़रता है. खाने की टेबल और मेरे बिस्तर दोनों जगहों पर मुझे मज़ा नहीं आता” मुझे यकीन है कि आप में से कोई भी अपने साथ यही सब देखने के लिए राजा बनने के सपने नहीं ले रहा होगा.

एम्परर सुंग की बात सुनकर जर्नल्स डर गए, उन्होंने एम्परर के खिलाफ कोई साजिश ना रचने और हमेशा वफादार बने रहने का वादा किया.

मगर एम्परर सयाना था उसे पता था कि दौलत के लालच में इंसान कुछ भी कर सकता है. एम्परर सुंग ने उनसे वादा किया” जिंदगी जीने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इज्ज़त और अमीरी में सुकून भरे दिन गुज़ारे जाए, अगर आप लोग अपना कंट्रोल छोड़ने को तैयार हो तो मै वादा करता हूँ कि आप सब को फाइन एस्टेट और दौलत से मालामाल कर दूंगा”

जर्नल्स हैरान थे कि एम्परर उन्हें दौलत और सिक्योरिटी देना चाहता है अब उन्हें डरने की कोई ज़रुरत नहीं थी. अगली सुबह हर एक जर्नल को उसकी पोस्ट रिजाइन कर दी गई. और साथ ही उन्होंने एम्परर सुंग से अपना रिटायर्मेंट भी एक्सेप्ट कर लिया. अब वे अपने-अपने एस्टेट के नोबेल और मास्टर बन गए थे जो एम्परर ने उन्हें बख्सा था. सिर्फ एक ही झटके में एम्परर सुंग ने अपने दुश्मनों को अपना वफादार बना लिया था.

एम्परर सुंग अपना किंगडम एक ही झंडे के नीचे लाना चाहता था. दूर साउथ के इलाके हान में सालो से बगावत की लड़ाई चल रही थी. लियु वहां का राजा था. जब रेबेल ने सरेंडर किया तो एम्परर ने उन्हें कोई पनिश नहीं किया बल्कि उसने रजा लियु को अपने कोर्ट में एक पोजीशन दे दी. यही नहीं एम्परर ने दोस्ती के तौर पर उसे अपने साथ वाइन पीने के लिए इनवाइट किया.

पैलेस में एम्परर सुंग ने राजा लियु को वाइन का ग्लास दिया पर राजा लियु पीने से डर रहा था क्योंकि उसे लगा कहीं इसमें ज़हर ना हो. उसने एम्परर से कहा” योर मेजेस्टी, मै जानता हूँ कि जो गलती इस गुलाम से हुई है उसकी सजा सिर्फ मौत है मगर फिर भी मै आपके सामने जान की भीख मांगता हूँ इसलिए मुझे माफ़ करे क्योंकि मै ये वाइन नहीं पी सकता”

ये बात सुनकर एम्परर हंस पड़ा. उसका कोई इरादा नहीं था राजा लियु को ज़हर देने का. रजा लियु को यकीन दिलाने के लिए उसने वो वाइन खुद पी ली. उस दिन से राजा लियु एम्परर का लॉयल बन गया.. जो कभी बहुत बड़ा रेबेल था अब वही एम्परर का सबसे पक्का दोस्त बन गया था.

एम्परर सुंग ने जर्नल्स को बड़े-बड़े एस्टेट गिफ्ट करके होशियारी का काम किया था. अब उनसे एम्परर को कोई डर नहीं था. उन्हें मारने से तो अच्छा था कि अपना लॉयल बना लिया जाए और इससे आर्मी का तख्तापलट भी हमेशा के लिए रुक गया. एम्परर सुंग पहला था जिसने चाइना में सिविल वार और वायोलेंस को खत्म किया. सुंग डाईनेस्टी तीन सेंचुरी तक चाइना में राज करती रही.

“वो आदमी जिंदगी भर आपका एहसानमंद रहेगा जिसे आपने मौत की सजा से बचाया हो, ऐसा आदमी आपकी खातिर दुनिया के आखिर कोने में भी चला जाएगा” जब आप अपने दुश्मनों से दोस्ती कर लेते है तो वो आपके दोस्तों से भी ज्यादा भरोसेमंद निकलते है.

हमारे दोस्त अक्सर लड़ाई ना हो जाए ये सोच कर हर बात पर हामी भर लेते है. आपको बुरा ना लगे इसलिए वे अपनी क्वालिटी छुपा कर रखते है. हो सकता है कि आप उनको इतने अच्छे से नहीं जानते जितना आपको लगता है. हो सकता है कि वे आपसे जलते हो. जब कोई मुसीबत आती है तो अक्सर दोस्त भाग जाते है “दूसरी तरफ आपके दुश्मन है जो किसी सोने की खान से कम नहीं है बस आपको ये खान खोदनी है”

अपने इरादे छुपा कर रखे

सत्रवी सदी में फ़्रांस की एक बहुत मशहूर नाचने वाली हुआ करती थी जिसका नाम था निनोन डी लेंक्लोस. वो इतनी खूबसूरत थी कि बड़े-बड़े पोलिटिशियन, थिंकर, राइटर उसके प्यार में पागल थे. प्यार के मामले में वो औरत काफी एक्सपीरिएंड थी.

निनोन ये बात जानती थी कि सेड्यूकशन एक गेम है, एक आर्ट है जिसमे प्रेक्टिस से परफेक्ट बना जा सकता है. धीरे-धीरे वो मशहूर होती चली गयी. फ़्रांस के अमीर घरो के लड़के उसके पास आते थे. वो उन्हें प्यार करना सिखाती थी. उन्ही में से मर्क़्युएस डी सेविने भी एक था.

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मर्क़्युएसबस 22 साल का ही था. वो बहुत अमीर और हेंडसम था मगर प्यार के मामले में बिलकुल अनाड़ी था. तब तक निनोन 62 साल की हो चुकी थी फिर भी काफी फेमस थी. उसने मर्क़्युएसकी स्टोरी सुनी. उसे एक जवान और सुन्दर काउंटेस से प्यार हो गया था. मगर उसे समझ नहीं आ रहा था कि अपने प्यार का इज़हार कैसे करे और इस चक्कर में उससे बहुत गलतिया भी हुई.

सबसे पहले तो निनोन ने मर्क़्युएसको समझाया कि प्यार किसी जंग से कम नहीं है. उसने समझाया कि मर्क़्युएसको अपना हर स्टेप प्लान करना पड़ेगा और फिर ध्यान से उन प्लान्स को एक्ज़ीक्यूट करना होगा. निनोन ने मर्क़्युएससे कहा कि वो अब प्यार की जंग के लिए तैयार हो जाए. उसे काउंटेस से दूरी बनानी होगी और उसको इग्नोर करना पड़ेगा.

मर्क़्युएसजब काउंटेस से दुबारा मिला तो एक दोस्त की तरह मिला. उसकी इस हरकत से काउंटेस को लगा कि वो सिर्फ दोस्ती करना चाहता है. वो इस बात से थोड़ी कन्फ्यूज़ हो गयी. अब अगला स्टेप था काउंटेस को जलाना. मर्क़्युएसहसींन और जवान लड़कियों के साथ पूरे में पेरिस में घूमने लगा. इससे काउंटेस खूब जली और उसे यकीन हो गया कि सारी लड़कियां मर्क़्युएसको पाना चाहती है.

निनोन एक्सप्लेन किया कि औरत ऐसे मर्द को चाहती है जिसे पीछे पहले से ही बहुत सी औरते पड़ी हो. ऐसे आदमी का प्यार जीतने में उसे ज्यादा ख़ुशी मिलती है.

काउंटेस को कन्फ्यूज़ करने और जेलेस फील कराने के बाद उसे सेड्युस करने का यही सही टाइम होगा. मर्क़्युएस को अब अपना रूटीन चेंज करना था उसका कोई अगला कदम बिलकुल अनप्रेडिक्टेबल होना चाहिए. उसे उन इवेंट्स को अवॉयड करना था जहाँ काउंटेस के आने के चांसेस थे और उन सैलून्स में जाना था जहाँ काउंटेस अक्सर आती थी.

दो हफ्तों बाद ही मर्क़्युएस इन सारे स्टेप्स में माहिर हो गया. निनोन उसकी प्रोग्रेस नोट करती थी. उसके जासूस उसे सारी खबर पहुंचाते थे. वो खूब हंसती थी जब मर्क़्युएस आकर उसे सारी कहानियाँ सुनाता था. निनोन ने सुना कि वो खूबसूरत काउंटेस अब मर्क़्युएस के लिए बेक़रार हो रही थी. वो उसके बारे में पूछताछ करती रहती थी. सोशल अफेयर्स में वो मर्क़्युएस को देखती रहती थी. निनोन को यकीन हो गया था कि अब काउंटेस को भी मर्क़्युएस से प्यार हो गया है. कुछ ही दिनों में वो उसकी हो जायेगी मगर तभी एक गड़बड़ हो गयी.

मर्क़्युएस काउंटेस से उसके घर मिलने गया था मगर वहां उससे मिलके वो डेसपेरेट हो गया. वो निनोन की एडवाइस भूल गया और उसका उल्टा कर दिया. उसने काउंटेस का हाथ पकड़ लिया और अपने प्यार का इज़हार कर दिया. उसकी इस हरकत से काउंटेस शाक्ड रह गयी उसने तुरन्त अपना हाथ छुड़ा लिया.

जैसे-जैसे रात ढलती गई वो खूबसूरत लड़की मर्क़्युएस को अवॉयड कर रही थी. उसने उसे गुडनाईट भी नहीं कहा और बाहर तक छोड़ने भी नहीं आई. मर्क़्युएस जब दुबारा उसके घर गया तो उसे बताया गया कि काउंटेस कहीं बाहर गयी है.

मगर मर्क़्युएस उसके घर कई बार गया फिर एक दिन काउंटेस उसे अन्दर बुला लिया. मगर अब सब कुछ बदल चूका था. जो काउंटेस उसे चाहने लगी थी वो अब मर्क़्युएस को देखकर अनकम्फर्टेबल और आक्वर्ड फील कर रही थी. और इस तरह एक लव स्टोरी का एंड हो गया.

ज्यादातर लोग हर वक्त वही बोलते है जो वे फील कर रहे होते है. वे सबके सामने अपना ओपिनियन रख देते है. ऐसे लोग अपना इंटेशन और प्लान तुरंत सबको बता देते है. हालांकि हम इंसानो के लिए ऐसा करना बड़ा ही नेचुरल और आसान है मगर लोगो से अपनी बाते छुपा कर रखना इतना आसन नहीं होता उसके लिए एफोर्ट करना पड़ता है. और सबसे बढ़कर हम में से बहुत से लोग ये मानते है कि ऑनेस्टी एक अच्छे इंसान होने की निशानी है. इससे आप सबका दिल जीत लेंगे. मगर कभी-कभी ये सच नहीं होता. ऑनेस्टी असल में एक ब्लंट इंस्ट्रूमेंट की तरह है जो बचाने से ज्यादा काटने का काम करता है“

जब आप ज़रुरत से ज्यादा ऑनेस्ट बनते है तो आप प्रेडिक्टेबल बन जाते है. ना तो लोग आपसे डरेंगे है ना ही रिस्पेक्ट करेंगे. पॉवरफुल बनने के लिए यही सही होगा कि ऑनेस्टी को साइड में रखा जाए. अपने ट्रू इंटेंशन को छुपाना सीखिए ये आपके बहुत काम आएगी.

लोग उसी पर यकीन करते है जो वो देखते सुनते है. धोखा देना ज्यादा आसान होता है. ऐसा शो कराईये जैसे आप कुछ और चाहते है. इससे आप पूरे फ्री होकर अपने रियल गोल्स पर ध्यान दे सकते है. “सेडयुकशन के गेम में कोंफ्लिक्ट लाये जैसे एक ही वक्त में चाहत और बेरुखी दोनों दिखाए, इससे ना सिर्फ वो भटक जाए बल्कि आपको पाने के लिए उसके अंदर एक आग भड़क जाए.

कभी भी अपने मास्टर से आगे ना निकले NEVER OUTSHINE THE MASTER

गेलिलियो गलेली एक इटेलियन साइंटिस्ट था. सन 1600 के शुरवाती दिनों में वो बड़ी प्रॉब्लम से गुज़र रहा था. क्योंकि उसे अपने रीसर्च की फंडिंग के लिए रुलेर्स पर डिपेंड रहना पड़ता था. गेलिलियो ने जितनी भी डिस्कवरीज़ और इन्वेंशन किये वे सब उसके रुलेर्स को डेडीकेट थे. तब रीनेसेस के टाइम में हर साइंटिस्ट को यही करना पड़ता था.

जब उसने मिलिट्री कम्पास का इन्वेशन किया तो उसको वो ड्यूक ऑफ़ गोंगाज़ा के सामने पेश करना पड़ा. उसने इस कम्पास को यूज करने के बारे में एक किताब भी लिखी थी. ये किताब गेलिलियो ने मेडीसी फेमिली को दी थी. ड्यूक और मेडीसी दोनों बहुत इम्प्रेस हुए और उन्होंने गेलिलियो को और स्टूडेंट दिए.

हालांकि गेलिलियों ने कई ग्रेट डिस्कवरी की फिर भी उनके रुलेर्स हमेशा उन्हें बस गिफ्ट देकर पे करते थे कभी कैश नहीं देते थे. इससे गेलिलियो हर चीज़ के लिए अपने रुलेर्स पर डिपेंड रहते थे. अपनी रोज़ी-रोटी चलाने के लिए उन्हें अपने रुलेर्स का फेवर लेना पड़ता था.

1610 में गेलिलियों ने ज्यूपिटर के मून की डिस्कवरी की. इस बार उसने एक नयी स्ट्रेटेज़ी अपनाई. उसने अपनी डिस्कवरी को अपने हर पेट्रोन के हिसाब से बाँट दी जैसे किसी के लिए टेलीस्कोप. दुसरे के लिए कोई किताब वगैरह- वगैरह. इस बार गेलिलियो ने मेडीसीस पर फोकस किया, उसने ज्यूपिटर के मून की डिस्कवरी उनके नाम कर दी.

ये बहुत बढ़िया टेक्टिक थी क्योंकि ज्यूपिटर हमेशा से ही मेडीसी फेमिली का सिम्बल रहा था. क्योंकि मेडीसी फॅमिली के फाउंडर कोसिमो 1 ज्यूपिटर को बहुत पॉवरफुल गॉड मानते थे. ग्रीक माइथोलोजी में ज्यूपिटर को ज़ियुस कहा जाता है. कोसिमो 1 ने ज्यूपिटर को मेडिसी डाईनेस्टी के पॉवर का सिम्बल मान लिया था. उसने 1540 में मेडिसी की फाउंडेशन की थी.

गेलिलियो ने एनाउंस किया कि उसने ज्यूपिटर के मून्स की खोज कोसिमो 2 के कोरोनेशन डे पर की थी. उसने सारी इटली और कोर्ट के आगे मेडीसी को ये हॉनर दिया. ज्यूपिटर के चार मून है. गेलिलियो ने दावा किया कि चारो मून कोसिमो 2 और उसके तीन भाइयों का सिम्बल है. चारो मून्स ज्यूपिटर के चारो तरफ उसी तरह घूमते है जैसे मेडीसी के फाउन्डर कोसिमो 1 के चारो बेटे.

ये सब करके गेलिलियों ने पूरी इटली को ये दिखाने की कोशिश की कि मेडीसी डाईनेस्टी को हेवन की ब्लेसिंग्स मिली हुई है. गेलिलियो ने एक एम्ब्ल्म भी बनाया जिसमे आसमान में चार स्टार्स के बीच में गॉड ज्यूपिटर को दिखाया गया था. उसने इस एम्ब्ल्म को कोसिमो 2 के नया सिम्बल बनाकर पेश किया.

गेलिलियों ने जो एफर्ट किया उसके काम आया. उसी साल कोसिमो 2 ने उसे राज्य का ऑफिशियल मेथमेटीशियन और फिलोसफर बना दिया.अब उसे पूरी सेलेरी मिलने लगी थी. अपने इस काम की वजह से अब वो किसी पैट्रन पर डिपेंड नहीं था. अब उसे किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़रुरत नहीं थी.

सारे मास्टर अपने सब्जेक्ट्स के सुपीरियर बनना चाहते है. उन्हें य डर होता है कि उनके सब्जेक्ट उनसे ज्यादा इंटेलिजेंट और ब्रिलिएन्ट ना बन जाए. उन्हें इन्वेंशन और साइंस डिस्कवरी से कोई लेना देना नहीं होता उन्हें तो बस अपने नाम और अपनी शान की फ़िक्र रहती है. मेडीसी फॅमिली का नाम आसमान के सितारों से जोड़कर गेलिलियों ने उन्हें और भी ज्यादा हॉनर दिया था.

गेलिलियों जैसे इंटेलिजेंट लोगो से उनके मास्टर इसीलिए इनसिक्योर रहते है क्योंकि वे नहीं चाहते कि वे बस फाईनेंसर रहे. वे इन इन्वेंशन और डिस्कवरीज़ में अपना नाम भी चाहते है. वे दुनिया को दिखाना चाहते है कि वे पॉवरफुल भी है और इंटेलीजेंट भी. गेलिलियों ये बात खूब अच्छे से समझते थे तभी उन्होंने मेडीसी फेमिली की इतनी खुशामद की.

गेलिलियों ने खुद को रूलर से ज्यादा इंटेलीजेंट दिखाने की कोई कोशिश नहीं की. तभी उनके मास्टर भी उनसे इनसिक्योर नहीं थे. बल्कि उसने अपने मास्टर मेडीसी फॅमिली को हेवेंली बॉडीज के साथ जोड़कर उनका स्टेटस इटली में ऊँचा कर दिया था.उसने खुद से ज्यादा अपने मास्टर् की शान बढ़ाई जिससे खुश होकर उसके मास्टर ने उसे खूब ईनाम दिए.

ये आपके लिए डेंजरस बात है अगर आप अपने मास्टर की इनसिक्योरिटी की वजह बनते है. आपको हर हाल में अपने मास्टर की खुशामद करनी है पर ऐसा चालकी से करे. ले जाने दे सारा क्रेडिट अपने मास्टर को. उन्हें हरगिज़ ये ना दिखाए कि आप उनसे ज्यादा ब्रिलिएंट है. मासूमियत से अपना काम करते रहे. हर काम में मास्टर की सलाह ज़रूर ले और अगर कोई कमाल का आईडिया आपके दिमाग में आता भी है तो उसका क्रेडिट भी मास्टर को दे दे.

अगर आप अपनी पॉवर चाहते है तो अपनी खूबियों को छुपा कर रखे. लोगो को नाम कमाने दे, आप उन्हें बिलकुल भी इनसिक्योर फील ना कराये. जब आपका वक्त आएगा तब यही बात आपके लिए एक एडवांटेज बन जायेगी.

उतना ही बोले जितनी ज़रुरत हो

बहुत पहले फ्रेंच कोर्ट में ये रिवाज था कि स्टेट इश्यूज पर पहले डिस्कस किया जाता था फिर उन्हें राजा के सामने पेश करते थे. नोबल्स और मिनिस्टर्स के बीच कई कई दिनों तक बहस चलती रहती थी. फिर उन्हें अपने दो रीप्रेजेंटटेटिव चुनने होते थे. दोनों ल्युईस XIV के आगे बारी-बारी से अपने व्यूज़ एक्सप्लेन करते थे. अब राजा को डीसाइड करना था कि स्टेट इश्यूज के लिए कौन सा रेजोल्यूशन बेस्ट रहेगा.

आखिर में रीप्रेजेंटेटिव राजा के पास आये. उन्होंने इश्यूज रखे और उन्हें रेज़ोल्व करने के दो बेस्ट पोसिबल टेक्टीज़ भी बताये. लुईस XIV बस सुनते रहे. उनके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं थे. जब वे लोग अपनी बात पूरी कर लेते तो राजा कहता” मै देखता हूँ” और बस यही बोलकर वो कोर्ट से चला जाता. लुईस XIV उस सब्जेक्ट पर कभी फिर बात नहीं करता था. उसके कोर्टमेन को कुछ दिनों बाद पता चलता था कि उसने क्या डीसीजन लिया था. क्योंकि तब तक लुईस स्टेट इश्यूज पर काम करवा चूका होता था.

उसकी चुप्पी से किसी को भी ये पता नहीं चलता था कि उसके दिमाग में चल क्या रहा है. उसके अगले स्टेप को प्रेडिक्ट करना बड़ा मुश्किल होता था. उसकी चुप्पी की वजह से ही उसके दरबारी लोग बाते करते रहते थे और वो सबके दिमाग की बात जान लेता था. मगर उसके दिमाग में क्या है ये किसी को पता नहीं चलता था. लुईस XIV उन लोगो से मिली इन्फोर्मेशन को उनके खिलाफ भी इस्तेमाल करता था. जिसकी वजह से वो बहुत पॉवरफुल बन गया था और लोग उससे डरते थे. वो किसी को भी उखाड़ फेंक सकता था क्योंकि उसे सबकी कमजोरी मालूम थी. तो इस तरह से साइलेंस लुईस XIV का सबसे बड़ा हथियार था.

अपनी बातो को लिमिट रखने से ना सिर्फ आप पॉवरफुल बनेगे बल्कि इससे आप कई गलतियाँ करने से भी बच सकते है. जब आप बिना सोचे बोल देते है तो कई बार गलत या बेवकूफी की बात भी बोल देते है और इससे आप मुसीबत में पड़ जाते है.

साल 1825 में रशिया में एक रेबेलेशन हुआ था. निकोलस I तब नया जार बना था. मगर लिबर्ल्स चेंज चाहते थे. वे चाहते थे कि रशिया एक मॉडर्न कंट्री बने. यहाँ की इकोनोमी और गवर्नमेंट बाकी यूरोपियन कंट्री के साथ कदम से कदम मिलाकर चले.

पर निकोलस I ने आखिर डीसेम्ब्रिस्ट अपराईजिंग में इस रेबेलेशन को कुचल दिया था. उसने हुक्म दिया कि रेबेलेशन के लीडर कोंद्रेती रैलेविव को फांसी पर चढा दिया जाए. रैलेविव के गले में फांसी का फंदा था और वो एक प्लेटफॉर्म पर खड़ा था. उसके पावों में पास दरवाजे खुल गए थे कि तभी उसके फंदे की रस्सी टूट गयी. और वो ज़मीन पर गिर पड़ा.

उस ज़माने में किसी मुजरिम के फंदे की रस्सी टूटना उपरवाले का चमत्कार मानी जाती थी और अक्सर मुजरिम को छोड़ दिया जाता था. लेकिन रैलेविव खड़ा हुआ और भीड़ के सामने जाकर चिल्लाया” देखा आप लोगो ने, रशिया में इन लोगो को कोई काम नहीं आता, यहाँ तक कि उनसे एक ढंग की रस्सी भी नहीं बनाई जाती”

राजा का मेसेंजर तुरंत जार के पास गया और उसे पूरी बात बताई. निकोलस I बड़ा डिसअपोइन्ट हुआ कि रैलेविव की फांसी टल गयी. मजबूरी में उसे रैलेविव के माफीनामे पर साइन करने पढ़े मगर साइन करने से पहले उसने मेसेंजर से पुछा” क्या रैलेविव ने इस चमत्कार के बाद कुछ कहा?” इस पर मेसेंजर ने जवाब दिया” सायर, उसने कहा कि रशिया में लोगो को एक रस्सी तक बनानी नहीं आती”

निकोलस I ने उसी वक्त वो माफीनामा फाड़कर फेंक दिया. उसने हुक्म दिया” ऐसी बात है! तो चलो इसे गलत साबित कर देते है” और अगले दिन ही रैलेविव् को फिर से फांसी के तख्ते तक लाया गया. और बदकिस्मती से इस बार रस्सी नहीं टूटी.

एक बार जब आप कुछ बोल देते है तो अपने वर्ड्स दुबारा वापिस नहीं ले सकते. तो जो बोले सोच समझ कर बोले. हो सकता है कि आपकी किसी बात का बाकी लोग बुरा मान जाए. या फिर आप खुद ही मुसीबत में फंस जाए. जैसा कि कहावत है “ कम बोलने से कम गलतियाँ होंगी”

कन्क्ल्युजन

ये बस कुछ एडवाइसेज़ है जो आप अपनी डेलीलाइफ में अप्लाई कर सकते है. ये ना सिर्फ उनके लिए यूजफुल है जो पॉवरफुल बनना चाहते है बल्कि आप दुसरो के साथ अपने रिलेशनशिप इम्प्रूव करने के लिए भी इन्हें यूज़ कर सकते है.

कभी भी अपने मास्टर से आगे मत बढिए को इस बात से भी समझ सकते है कि जो लोग आपकी हेल्प करते है,उनका एहसान हमेशा मानो.अपने दुश्मनों को यूज़ कीजिये से मतलब है कि लोगो की गलतियों को माफ़ करके उन्हें एक और मौका दे.

अपने ट्रू इमोशन को छुपाकर रखने से आप हम्बल और अनअज्युमिंग बने रहेंगे. कम बोलकर आप और भी बेहतर इंसान बन सकते है. इस किताब को पढ़कर ज़रूरी नहीं कि आप कोई पोलिटीशियन बन जाये मगर कुछ न कुछ तो ज़रूर सीखेंगे.

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